श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.37.11 
इत्युक्तास्ते कुमारास्तु आचचक्षुर्यथातथम्।
उग्रसेनाय मुसलं जज्ञे साम्बस्य चोदरात्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों की यह बात सुनकर राजकुमारों ने राजा उग्रसेन को पूरी कहानी सुनाई और साम्ब के पेट से एक मूसल उत्पन्न हुआ।
 
On hearing the sages say this, the princes narrated the entire story verbatim to King Ugrasena and a pestle was born from Samba's stomach.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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