श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 36: द्विविद-वध  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  5.36.22-23 
अनेन दुष्टकपिना दैत्यपक्षोपकारिणा।
जगन्निराकृतं वीर दिष्टॺा स क्षयमागत:॥ २२॥
इत्युक्त्वा दिवमाजग्मुर्देवा हृष्टास्सगुह्यका:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! इस दुष्ट वानर ने, जो दैत्यों का हित करने वाला था, संसार को महान् कष्ट पहुँचाया था; यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आज वह तुम्हारे द्वारा मारा गया। ऐसा कहकर गुह्यकों सहित देवतागण अत्यन्त हर्षपूर्वक स्वर्ग को लौट गए। ॥22-23॥
 
"O brave one! This evil monkey, who was a benefactor of the demons, had caused great trouble to the world; it is a matter of great fortune that today he has been killed by you." Having said this, the gods along with the Guhyakas returned to heaven very joyfully. ॥22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)