श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 36: द्विविद-वध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.36.20 
पतता तच्छरीरेण गिरेश्शृङ्गमशीर्यत।
मैत्रेय शतधा वज्रिवज्रेणेव विदारितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! जब वह गिरा, तो उसके शरीर से टकराकर उस पर्वत का शिखर सैकड़ों टुकड़ों में टूट गया, मानो इंद्र के वज्र से वह छिन्न-भिन्न हो गया हो।
 
O Maitreya, when he fell, the peak of that mountain broke into hundreds of pieces after being hit by his body, as if it had been pierced by Indra's thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)