vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 36: द्विविद-वध
»
श्लोक 15
श्लोक
5.36.15
तत: कोपपरीतात्मा भर्त्सयामास तं हली।
तथापि तमवज्ञाय चक्रे किलकिलध्वनिम्॥ १५॥
अनुवाद
तब श्री हलधर क्रोधित हो गए और उसे धमकाया, लेकिन वह उनकी बात नहीं मानता और खिलखिलाकर हंसने लगा।
Then Shri Haldhar became angry and threatened him, but he disobeyed him and started giggling.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×