श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 36: द्विविद-वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.36.10 
तेन विप्रकृतं सर्वं जगदेतद्दुरात्मना।
निस्स्वाध्यायवषट्कारं मैत्रेयासीत्सुदु:खितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! उस दुष्टात्मा ने इस सम्पूर्ण जगत् को स्वाध्याय और वशीकरण से शून्य कर दिया था, जिससे यह जगत् अत्यन्त दुःखमय हो गया था॥10॥
 
O Brahmin! That evil soul had made this entire world void of Swadhyaya and Vshatakara, due to which this world had become extremely sorrowful.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)