vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 35: साम्बका विवाह
»
श्लोक 36
श्लोक
5.35.36
भीष्मद्रोणकृपादीनां प्रणम्य वदतां प्रियम्।
क्षान्तमेव मयेत्याह बलो बलवतां वर:॥ ३६॥
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रणाम करके मधुर वचन बोलते हुए पराक्रमी बलरामजी ने भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य आदि से कहा- "ठीक है, मैंने तुम्हें क्षमा कर दिया।"
Then, with salutation and speaking sweet words, the valiant Balarama said to Bhishma, Drona, Kripa etc. - "Okay, I have forgiven you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×