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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 35: साम्बका विवाह
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श्लोक 3
श्लोक
5.35.3
श्रीपराशर उवाच
मैत्रेय श्रूयतां कर्म यद्रामेणाभवत्कृतम्।
अनन्तेनाप्रमेयेन शेषेण धरणीधृता॥ ३॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मैत्रेय! अनंत, अपरिमेय, भूमण्डलधारी शेषावतार श्री बलरामजी के कर्मों को सुनो - ॥3॥
Shri Parasharji said – O Maitreya! Listen to the deeds done by the infinite, immeasurable, grounded Sheshavatar Shri Balramji – ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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