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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 35: साम्बका विवाह
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श्लोक 25
श्लोक
5.35.25
पारिजाततरो: पुष्पमञ्जरीर्वनिताजन:।
बिभर्ति यस्य भृत्यानां सोऽप्येषां न महीपति:॥ २५॥
अनुवाद
क्या वह कौरवों का राजा नहीं है जिसकी पत्नियाँ भी पारिजात वृक्ष के पुष्प-गुच्छ धारण करती हैं? [यह कैसा आश्चर्य है?]
Is he not the king of the Kauravas whose wives also wear flower-bundles of the Paarijaat tree? [What wonder is this?]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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