Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 5.35.17: तुम सबको समान आसन और भोजन देकर हमने तुम्हें अभिमानी बना दिया है; इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है; क्योंकि प्रेमवश हमने नीति का विचार नहीं किया॥17॥ | vishnu अध्याय 5.35: साम्बका विवाह । vishnu अंश 5: पंचम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गर्वमारोपिता यूयं समानासनभोजनै:।
को दोषो भवतां नीतिर्यत्प्रीत्या नावलोकिता॥ १७॥
अनुवाद
तुम सबको समान आसन और भोजन देकर हमने तुम्हें अभिमानी बना दिया है; इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है; क्योंकि प्रेमवश हमने नीति का विचार नहीं किया॥17॥
By treating you all with equal seats and food, we have made you arrogant; this is not your fault; because out of love, we did not think about the policy.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥