श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 35: साम्बका विवाह  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.35.17 
गर्वमारोपिता यूयं समानासनभोजनै:।
को दोषो भवतां नीतिर्यत्प्रीत्या नावलोकिता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तुम सबको समान आसन और भोजन देकर हमने तुम्हें अभिमानी बना दिया है; इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है; क्योंकि प्रेमवश हमने नीति का विचार नहीं किया॥17॥
 
By treating you all with equal seats and food, we have made you arrogant; this is not your fault; because out of love, we did not think about the policy.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)