vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन
»
श्लोक 4
श्लोक
5.34.4
पौण्ड्रको वासुदेवस्तु वासुदेवोऽभवद्भुवि।
अवतीर्णस्त्वमित्युक्तो जनैरज्ञानमोहितै:॥ ४॥
अनुवाद
अज्ञानी मनुष्य पौण्ड्रकवंशी वसुदेव नामक राजा की स्तुति इस प्रकार करते थे कि, ‘आपने वसुदेव के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया है।’ ॥4॥
Ignorant men used to praise a king named Vasudeva from the Paundraka dynasty by saying, 'You have incarnated on earth in the form of Vasudeva.' ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×