श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.34.38 
चक्रप्रतापनिर्दग्धा कृत्या माहेश्वरी तदा।
ननाश वेगिनी वेगात्तदप्यनुजगाम ताम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस चक्र के तेज से जलकर और टुकड़े-टुकड़े होकर वह माहेश्वरी कृत्या बड़े वेग से दौड़ने लगी और वह चक्र भी उसी वेग से उसका पीछा करने लगा ॥38॥
 
Burned by the brilliance of that discus and being torn into pieces that Maheshwari Kritya started running with great speed and that discus also started chasing her with the same speed. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)