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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन
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श्लोक 30
श्लोक
5.34.30
अविमुक्ते महाक्षेत्रे तोषितस्तेन शङ्कर:।
वरं वृणीष्वेति तदा तं प्रोवाच नृपात्मजम्॥ ३०॥
अनुवाद
अविमुक्त महाक्षेत्र में उस राजकुमार से संतुष्ट होकर श्रीशंकर ने कहा - 'वर मांगो' ॥30॥
Satisfied with that prince in the Avimukt Mahakshetra, Shri Shankar said - 'Ask for a boon'. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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