vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन
»
श्लोक 30
श्लोक
5.34.30
अविमुक्ते महाक्षेत्रे तोषितस्तेन शङ्कर:।
वरं वृणीष्वेति तदा तं प्रोवाच नृपात्मजम्॥ ३०॥
अनुवाद
अविमुक्त महाक्षेत्र में उस राजकुमार से संतुष्ट होकर श्रीशंकर ने कहा - 'वर मांगो' ॥30॥
Satisfied with that prince in the Avimukt Mahakshetra, Shri Shankar said - 'Ask for a boon'. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×