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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन
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श्लोक 3
श्लोक
5.34.3
श्रीपराशर उवाच
गदतो मम विप्रर्षे श्रूयतामिदमादरात्।
नरावतारे कृष्णेन दग्धा वाराणसी यथा॥ ३॥
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - हे ब्रह्मर्षि! मैं आपको बता रहा हूँ कि किस प्रकार भगवान ने मनुष्य रूप धारण करके काशीपुरी को जला दिया था। कृपया ध्यानपूर्वक सुनें।
Shri Parashar Ji said - Oh Brahmarshi! I am telling you how God had burnt Kashipuri after taking the human form. Please listen carefully.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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