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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन
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श्लोक 23
श्लोक
5.34.23
चक्रमेतत्समुत्सृष्टं गदेयं ते विसर्जिता।
गरुत्मानेष चोत्सृष्टस्समारोहतु ते ध्वजम्॥ २३॥
अनुवाद
देख, मैंने यह चक्र, यह गदा तुझ पर छोड़ी है और यह गरुड़ भी छोड़ रहा हूँ, वह तेरे ध्वज पर बैठे। ॥23॥
See, I have released this discus, this mace on you and I am also releasing this eagle, may it sit on your flag. ॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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