श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.34.18 
किरीटकुण्डलधरं नानारत्नोपशोभितम्।
तं दृष्ट्वा भावगम्भीरं जहास गरुडध्वज:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उनको नाना प्रकार के रत्नों से विभूषित मुकुट और कुण्डल पहने देखकर भगवान गरुड़ध्वज गम्भीरतापूर्वक हंसने लगे॥18॥
 
Seeing him wearing a crown and earrings decorated with different types of gems, Lord Garudadhwaj started laughing seriously. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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