| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन » श्लोक 12 |
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| | | | श्लोक 5.34.12  | शरणं ते समभ्येत्य कर्तास्मि नृपते तथा।
यथा त्वत्तो भयं भूयो न मे किञ्चिद्भविष्यति॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | हे राजन, मैं आपकी शरण में आऊँगा और कुछ ऐसा करूँगा जिससे मुझे आपसे भय न रहे ॥12॥ | | | | O King, I will take refuge in you and do something so that I will no longer have to fear you. ॥12॥ | | ✨ ai-generated | | |
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