श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.34.10 
गृहीतचिह्नवेषोऽहमागमिष्यामि ते पुरम्।
उत्स्रक्ष्यामि च तच्चक्रं निजचिह्नमसंशयम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं अपना चिह्न और वेष धारण करके तुम्हारे नगर में आऊँगा और निश्चय ही अपना चिह्न चक्र तुम पर छोड़ दूँगा॥ 10॥
 
I will come to your city wearing my symbol and attire and will certainly drop my symbol, the discus, on you.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)