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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 34: पौण्ड्रक-वध तथा काशीदहन
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श्लोक 10
श्लोक
5.34.10
गृहीतचिह्नवेषोऽहमागमिष्यामि ते पुरम्।
उत्स्रक्ष्यामि च तच्चक्रं निजचिह्नमसंशयम्॥ १०॥
अनुवाद
मैं अपना चिह्न और वेष धारण करके तुम्हारे नगर में आऊँगा और निश्चय ही अपना चिह्न चक्र तुम पर छोड़ दूँगा॥ 10॥
I will come to your city wearing my symbol and attire and will certainly drop my symbol, the discus, on you.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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