श्री पाराशरजी बोले - त्रिशूलपाणि भगवान् उमापति के मुख से यह सुनकर श्रीगोविन्द ने बाणासुर के प्रति अपना क्रोध त्याग दिया और प्रसन्न होकर उससे बोले - 45॥
Shri Parasharji said - On hearing this from Trishulpaani Lord Umapati, Shri Govind gave up his anger towards Banasur and became happy and said to him - 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥