श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 31: भगवान् का द्वारकापुरीमें लौटना और सोलह हजार एक सौ कन्याओंसे विवाह करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.31.8 
देवदेव जगन्नाथ कृष्ण विष्णो महाभुज।
शङ्खचक्रगदापाणे क्षमस्वैतद्‍व्यतिक्रमम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
रब्बा बे! हे जगन्नाथ! हे कृष्ण! हे विष्णो! हे महान भुजाएं! हे शंखचक्रगदापाणे! कृपया मेरी धृष्टता को क्षमा करें। 8॥
 
O God! Hey Jagannath! Hey Krishna! Hey Vishno! Oh great arms! Oh Shankhachakragadapaane! Please forgive my audacity. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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