श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 31: भगवान् का द्वारकापुरीमें लौटना और सोलह हजार एक सौ कन्याओंसे विवाह करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.31.11 
अवतीर्याथ गरुडात्सत्यभामासहायवान्।
निष्कुटे स्थापयामास पारिजातं महातरुम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् गरुड़जी सत्यभामा के साथ गरुड़जी से नीचे उतरे और उस महान पारिजात वृक्ष को सत्यभामा के गृह-उद्यान में रोप दिया॥11॥
 
Thereafter, Garuda along with Satyabhama came down from the eagle and planted that great Parijata tree in [Satybhama's] home garden. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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