श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.30.9 
सन्ध्या रात्रिरहो भूमिर्गगनं वायुरम्बु च।
हुताशनो मनो बुद्धिर्भूतादिस्त्वं तथाच्युत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे अच्युत! संध्या, रात्रि, दिन, पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, अग्नि, मन, बुद्धि और अहंकार - ये सब आप ही हैं॥9॥
 
O Achyuta! Evening, night, day, earth, sky, air, water, fire, mind, intellect and ego - all these are you.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)