श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  5.30.80 
सकलभुवनसूतिर्मूर्तिरल्पाल्पसूक्ष्मा
विदितसकलवेदैर्ज्ञायते यस्य नान्यै:।
तमजमकृतमीशं शाश्वतं स्वेच्छयैनं
जगदुपकृतिमर्त्यं को विजेतुं समर्थ:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जो अजन्मा, अकर्ता और सनातन परमेश्वर अत्यन्त सूक्ष्म और सूक्ष्म रूप से सम्पूर्ण जगत् का रचयिता है, जिसे सम्पूर्ण वेदों को जानने वाले अन्य मनुष्य भी नहीं जान सकते और जिसने जगत् का उपकार करने के लिए अपनी इच्छा से ही मनुष्य रूप धारण किया है, उस अजन्मा, अकर्ता और सनातन परमेश्वर को कौन हरा सकता है?॥ 80॥
 
Who is capable of defeating that unborn, non-doer and eternal God, whose extremely tiny and subtle form is the creator of the entire universe, cannot be known even by other people who know all the Vedas, and who has taken the human form of his own will to benefit the world?॥ 80॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे त्रिंशोऽध्याय:॥ ३०॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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