| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 30: पारिजात-हरण » श्लोक 78 |
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| | | | श्लोक 5.30.78  | न चापि सर्गसंहारस्थितिकर्ताखिलस्य य:।
जितस्य तेन मे व्रीडा जायते विश्वरूपिणा॥ ७८॥ | | | | | | अनुवाद | | जो सम्पूर्ण जगत् के रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं, उन विश्वरूप भगवान् से पराजित होने में मुझे कोई संकोच नहीं है ॥ 78॥ | | | | I have no hesitation in being defeated by the Universal Form Lord who is the creator, sustainer and destroyer of the entire universe. ॥ 78॥ | | ✨ ai-generated | | |
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