श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.30.72 
कीदृशं देवराज्यं ते पारिजातस्रगुज्ज्वलाम्।
अपश्यतो यथापूर्वं प्रणयाभ्यागतां शचीम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
अब देवताओं के राजा होने से तुम्हें क्या सुख मिलेगा, जब तुम प्रेमवश तुम्हारे पास आई हुई शची को पहले की भाँति पारिजात पुष्पों की माला से सुशोभित नहीं देखते?॥ 72॥
 
Now, what joy will you get from being the king of gods, when you do not see Shachi, who has come to you out of love, adorned with a garland of Paarijaat flowers as before?॥ 72॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas