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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 30: पारिजात-हरण
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श्लोक 69
श्लोक
5.30.69
क्षिप्तं वज्रमथेन्द्रेण जग्राह भगवान्हरि:।
न मुमोच तदा चक्रं शक्रं तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ ६९॥
अनुवाद
श्रीहरि ने इन्द्र द्वारा छोड़े हुए वज्र को अपने हाथों में पकड़ लिया और अपना चक्र छोड़े बिना ही इन्द्र से कहा - अरे, रुको!॥69॥
Sri Hari caught the thunderbolt released by Indra in his hands and without releasing his own discus said to Indra, "Hey, wait!"॥ 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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