श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.30.64 
गरुत्मानपि तुण्डेन पक्षाभ्यां च नखाङ्कुरै:।
भक्षयंस्ताडयन् देवान् दारयंश्च चचार वै॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान के साथ गरुड़जी भी अपनी चोंच, पंख और पंजों से देवताओं को खाते, मारते और फाड़ते हुए विचरण कर रहे थे।
 
Along with Sri Bhagavan, Garudaji too was wandering around eating, killing and tearing the gods with his beak, wings and claws. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)