श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  5.30.63 
साध्या विश्वेऽथ मरुतो गन्धर्वाश्चैव सायकै:।
शार्ङ्गिणा प्रेरितैरस्ता व्योम्नि शाल्मलितूलवत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
भगवान् के छोड़े हुए बाणों के कारण साध्य, विश्वेदेव, मरुद्गण और गन्धर्व रुई के समान आकाश में समा गए ॥63॥
 
Due to the arrows shot by the Lord, the Sadhyas, the Vishvedevs, the Marudgans and the Gandharvas got absorbed in the sky like the cotton of cotton. 63॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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