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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 30: पारिजात-हरण
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श्लोक 58
श्लोक
5.30.58
एकैकमस्त्रं शस्त्रं च देवैर्मुक्तं सहस्रश:।
चिच्छेद लीलयैवेशो जगतां मधुसूदन:॥ ५८॥
अनुवाद
तीनों लोकों के स्वामी श्री मधुसूदन ने अपनी दिव्य लीला से देवताओं के छोड़े हुए प्रत्येक अस्त्र को हजारों टुकड़ों में तोड़ डाला।
Sri Madhusudana, the Lord of the three worlds, by his divine play broke every weapon released by the gods into thousands of pieces. 58
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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