श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.30.52 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्ता रक्षिणो गत्वा शच्या: प्रोचुर्यथोदितम्।
श्रुत्वा चोत्साहयामास शची शक्रं सुराधिपम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले- सत्यभामा के ऐसा कहने पर वनरक्षक शची के पास गए और उन्हें सारा वृत्तांत शब्दशः सुनाया। यह सब सुनकर शची ने अपने पति देवराज इन्द्र को प्रोत्साहित किया। 52.
 
Shri Parashar ji said- After Satyabhama said this, the forest guards went to Shachi and told her the entire story verbatim. After listening to all this, Shachi encouraged her husband Devraj Indra. 52.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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