श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.30.45 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्ते तैरुवाचैतान् सत्यभामातिकोपिनी।
का शची पारिजातस्य को वा शक्रस्सुराधिप:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - उद्यानरक्षकों की यह बात सुनकर सत्यभामा अत्यन्त क्रोधित होकर बोली - "यह पारिजात कौन है - शची या देवराज इन्द्र ?॥ 45॥
 
Sri Parashara said - On hearing the garden guards say this, Satyabhama became very angry and said - "Who is this Paarijaat - Shachi or Devraja Indra?॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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