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श्लोक 5.30.43  |
अवश्यमस्य देवेन्द्रो निष्कृतिं कृष्ण यास्यति।
वज्रोद्यतकरं शक्रमनुयास्यन्ति चामरा:॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| हे कृष्ण! इस वृक्ष का बदला लेने के लिए देवराज इन्द्र अवश्य ही अपने वज्र सहित तैयार होंगे और देवता भी अवश्य ही उनका अनुसरण करेंगे॥43॥ |
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| O Krishna! The king of gods Indra will certainly be ready with his thunderbolt to take revenge for this tree and the gods too will certainly follow him. ॥ 43॥ |
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