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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 30: पारिजात-हरण
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श्लोक 39
श्लोक
5.30.39
भो शची देवराजस्य महिषी तत्परिग्रहम्।
पारिजातं न गोविन्द हर्तुमर्हसि पादपम्॥ ३९॥
अनुवाद
"हे गोविंद! यह पारिजात वृक्ष देवराज इंद्र की पत्नी रानी शची की संपत्ति है। कृपया इसे मत छीनिए।"
"O Govinda! This Paarijaat tree is the property of Queen Shachi, the wife of the king of gods Indra. Please do not snatch it."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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