श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.30.38 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तस्स प्रहस्यैनां पारिजातं गरुत्मति।
आरोपयामास हरिस्तमूचुर्वनरक्षिण:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशरजी बोले- सत्यभामा के ऐसा कहने पर श्रीहरि ने हँसते हुए वह पारिजात वृक्ष गरुड़ पर रख दिया; तब नंदनवन के रक्षकों ने कहा-॥ 38॥
 
Shri Parasharji said - On Satyabhama saying this, Shri Hari laughingly placed that Parijat tree on Garuda; Then the protectors of Nandanvan said-॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)