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श्लोक 5.30.34  |
यदि चेत्त्वद्वच: सत्यं त्वमत्यर्थं प्रियेति मे।
मद्गेहनिष्कुटार्थाय तदयं नीयतां तरु:॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| यदि तुम्हारा यह कहना कि ‘तुम मेरे सबसे प्रिय हो’ सत्य है तो इस वृक्ष को मेरे पास ले जाओ और इसे मेरे घर के बगीचे में लगा दो॥ 34॥ |
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| If what you say that 'you are my most beloved' is true then take this tree to me to plant it in my home garden.॥ 34॥ |
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