श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.30.27 
अदितिरुवाच
मत्प्रसादान्न ते सुभ्रु जरा वैरूप्यमेव वा।
भविष्यत्यनवद्याङ्गि सुस्थिरं नवयौवनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अदिति बोलीं - हे सुन्दरी! मेरी कृपा से तुम्हें कभी वृद्धावस्था या कुरूपता नहीं होगी। हे अनिन्दितांगी! तुम्हारा यौवन सदैव स्थिर रहेगा। 27॥
 
Aditi said – Oh beautiful eyebrow! By my grace you will never suffer from old age or deformity. Hey Aninditangi! Your youth will always remain constant. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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