| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 30: पारिजात-हरण » श्लोक 11-13 |
|
| | | | श्लोक 5.30.11-13  | देवा दैत्यास्तथा यक्षा राक्षसास्सिद्धपन्नगा:।
कूष्माण्डाश्च पिशाचाश्च गन्धर्वा मनुजास्तथा॥ ११॥
पशवश्च मृगाश्चैव पतंगाश्च सरीसृपा:।
वृक्षगुल्मलता बह्वॺः समस्तास्तृणजातय:॥ १२॥
स्थूला मध्यास्तथा सूक्ष्मा स्सूक्ष्मात्सूक्ष्मतराश्च ये।
देहभेदा भवान् सर्वे ये केचित्पुर्गलाश्रया:॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | देवता, दैत्य, यक्ष, दैत्य, सिद्ध, सर्प, कूष्माण्ड, भूत, गन्धर्व, मनुष्य, पशु, मृग, पतंग, सरीसृप (सांप), नाना प्रकार के वृक्ष, झाड़ियाँ और लताएँ, घास की सब प्रजातियाँ तथा स्थूल, मध्यम, सूक्ष्म और सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर जितने भी प्रकार के शरीर हैं - जो पुर्गल (परमाणु) पर आश्रित हैं - वे सब आप ही हैं ॥11-13॥ | | | | The gods, demons, yakshas, devils, siddhas, serpents, kushmandas, ghosts, gandharvas, human beings, animals, deer, kites, reptiles (snakes), various trees, bushes and creepers, all species of grass, and all the types of bodies - gross, medium, subtle and even subtler than the subtle - that are dependent on the purgal (atom) - are all you. ॥11-13॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|