श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 3: भगवान् का आविर्भाव तथा योगमायाद्वारा कंसकी वंचना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.3.6 
ससृजु: पुष्पवर्षाणि देवा भुव्यन्तरिक्षगा:।
जज्वलुश्चाग्नयश्शान्ता जायमाने जनार्दने॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्री जनार्दन के प्रकट होते ही देवगण पृथ्वी पर पुष्पवर्षा करने लगे और यज्ञाग्नि शान्त होकर पुनः प्रज्वलित हो गई॥6॥
 
On the appearance of Shri Janardan, the celestial gods started showering flowers on the earth and the Yagya fire became quiet and lit up again. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)