श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 3: भगवान् का आविर्भाव तथा योगमायाद्वारा कंसकी वंचना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.3.4 
सन्तस्सन्तोषमधिकं प्रशमं चण्डमारुता:।
प्रसादं निम्नगा याता जायमाने जनार्दने॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री जनार्दन के जन्म लेने पर मुनियों को अत्यंत संतोष हुआ, प्रचण्ड वायु शांत हो गई और नदियाँ अत्यंत स्वच्छ हो गईं॥4॥
 
On the birth of Shri Janardan, the saints felt extremely satisfied, the fierce wind calmed down and the rivers became very clean. 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd