श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 3: भगवान् का आविर्भाव तथा योगमायाद्वारा कंसकी वंचना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  5.3.25-26 
कंसस्तूर्णमुपेत्यैनां ततो जग्राह बालिकाम्।
मुञ्च मुञ्चेति देवक्या सन्नकण्ठॺा निवारित:॥ २५॥
चिक्षेप च शिलापृष्ठे सा क्षिप्ता वियति स्थिता।
अवाप रूपं सुमहत्सायुधाष्टमहाभुजम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर कंस ने तुरन्त जाकर देवकी के रुंधे हुए स्वर में 'मुझे छोड़ दो, मुझे छोड़ दो' कहने पर भी उस कन्या को पकड़ लिया और एक शिला पर पटक दिया। उसके पटकते ही वह कन्या आकाश में चली गई और अस्त्र-शस्त्रों से युक्त एक महान् अष्टभुजा रूप धारण कर लिया॥25-26॥
 
On hearing this, Kansa immediately went and caught the girl despite Devaki's choked voice saying 'Leave me, leave me' and threw her on a rock. As soon as he threw her, she settled in the sky and assumed a great eight-armed form armed with weapons.॥25-26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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