श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 3: भगवान् का आविर्भाव तथा योगमायाद्वारा कंसकी वंचना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.3.23 
आदाय वसुदेवोऽपि दारिकां निजमन्दिरे।
देवकीशयने न्यस्य यथापूर्वमतिष्ठत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब वसुदेव उस कन्या को अपने महल में ले गए और देवकी के शयन कक्ष में सुलाकर फिर पहले की भाँति बैठ गए॥23॥
 
Then Vasudev took the girl to his palace and made her sleep in Devaki's bedroom and then sat down as before.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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