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श्लोक 5.3.23  |
आदाय वसुदेवोऽपि दारिकां निजमन्दिरे।
देवकीशयने न्यस्य यथापूर्वमतिष्ठत॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| तब वसुदेव उस कन्या को अपने महल में ले गए और देवकी के शयन कक्ष में सुलाकर फिर पहले की भाँति बैठ गए॥23॥ |
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| Then Vasudev took the girl to his palace and made her sleep in Devaki's bedroom and then sat down as before.॥ 23॥ |
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