श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 3: भगवान् का आविर्भाव तथा योगमायाद्वारा कंसकी वंचना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.3.2 
ततोऽखिलजगत्पद्मबोधायाच्युतभानुना।
देवकीपूर्वसन्ध्यायामाविर्भूतं महात्मना॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सूर्यदेवरूपी महात्मा अच्युत ने कमलरूपी सम्पूर्ण जगत् को विकसित करने के लिए देवकीरूपी संध्या के समय प्रकट हुए॥2॥
 
Thereafter, Mahatma Achyuta in the form of Suryadev appeared in the evening in the form of Devki to develop the entire world in the form of lotus. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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