श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 3: भगवान् का आविर्भाव तथा योगमायाद्वारा कंसकी वंचना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.3.16 
मोहिताश्चाभवंस्तत्र रक्षिणो योगनिद्रया।
मथुराद्वारपालाश्च व्रजत्यानकदुन्दुभौ॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब वसुदेवजी बाहर जा रहे थे, तब मथुरा के कारागार के रक्षक और द्वारपाल योगनिद्रा के प्रभाव से अचेत हो गए ॥16॥
 
While Vasudevji was going out, the prison guard and the gatekeeper of Mathura became unconscious due to the effect of Yoga Nidra. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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