vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 29: नरकासुरका वध
»
श्लोक 33
श्लोक
5.29.33
ता: कन्यास्तांस्तथा नागांस्तानश्वान्द्वारकां पुरीम्।
प्रापयामास गोविन्दस्सद्यो नरककिङ्करै:॥ ३३॥
अनुवाद
श्रीकृष्णचन्द्र ने तुरन्त ही उन कन्याओं, हाथियों और घोड़ों को नरकासुर के सेवकों द्वारा द्वारकापुरी भिजवा दिया।
Sri Krishnachandra immediately had those girls, elephants and horses sent to Dwarkapuri through the servants of Narakasura. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×