श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 29: नरकासुरका वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.29.30 
श्रीपराशर उवाच
तथेति चोक्त्वा धरणीं भगवान‍्भूतभावन:।
रत्नानि नरकावासाज्जग्राह मुनिसत्तम॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मुनिश्रेष्ठ! तत्पश्चात भगवान् भूतभावन ने पृथ्वी से कहा - "तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो" और फिर नरकासुर के महल से नाना प्रकार के रत्न ले आये ॥30॥
 
Shri Parasharji said – O great sage! Thereafter, Lord Ghost said to the earth – “May your wish be fulfilled” and then took different types of gems from the palace of Narakasura. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)