श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 29: नरकासुरका वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.29.2 
प्रविश्य द्वारकां सोऽथ समेत्य हरिणा तत:।
कथयामास दैत्यस्य नरकस्य विचेष्टितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
द्वारका आकर उन्होंने भगवान् से भेंट की और नरकासुर के अत्याचारों का वर्णन किया॥ 2॥
 
Coming to Dvaraka, he met the Lord and narrated to him the atrocities committed by Narakasura.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)