श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 29: नरकासुरका वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.29.14 
सञ्चित्यागतमारुह्य गरुडं गगनेचरम्।
सत्यभामां समारोप्य ययौ प्राग्ज्योतिषं पुरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
फिर स्मरण होते ही उन्होंने सत्यभामा को आकाशगामी गरुड़ पर चढ़ा दिया और स्वयं उस पर चढ़कर प्राग्ज्योतिषपुर चले गए ॥14॥
 
Then as soon as he remembered, he offered Satyabhama on the sky-going eagle and himself climbed on it and went to Pragjyotishpur. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)