श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 29: नरकासुरका वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.29.13 
श्रीपराशर उवाच
इति श्रुत्वा स्मितं कृत्वा भगवान‍्देवकीसुत:।
गृहीत्वा वासवं हस्ते समुत्तस्थौ वरासनात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - इन्द्र के ये वचन सुनकर श्रीदेवकीनन्दन मुस्कुराये और इन्द्र का हाथ पकड़कर अपने उत्तम आसन से उठ खड़े हुए॥13॥
 
Shri Parasharji said - Hearing these words of Indra, Shridevkinandan smiled and got up from his best seat holding Indra's hand. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)