श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 29: नरकासुरका वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.29.12 
दुर्नीतमेतद‍्गोविन्द मया तस्य निवेदितम्।
यदत्र प्रति कर्तव्यं तत्स्वयं परिमृश्यताम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे गोविन्द! मैंने तुम्हें उसके सारे दुष्कर्म बता दिये हैं; अब तुम उनके निवारण का उपाय सोचो।
 
O Govinda! I have told you about all his misdeeds; you should think about the remedy for them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)