श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 29: नरकासुरका वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.29.11 
अमृतस्राविणी दिव्ये मन्मातु: कृष्ण कुण्डले।
जहार सोऽसुरोऽदित्या वाञ्छत्यैरावतं गजम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण! उसने मेरी माता अदिति के अमृत प्रवाहित करने वाले दोनों दिव्य कुण्डल ले लिए हैं और अब वह इस ऐरावत हाथी को भी ले जाना चाहता है॥ 11॥
 
O Krishna, he has taken both the celestial earrings that flow nectar from my mother Aditi and now he wants to take this Airavat elephant also.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)