श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 28: रुक्मीका वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.28.15 
ततो जहास स्वनवत्कलिङ्गाधिपतिर्द्विज।
दन्तान्विदर्शयन्मूढो रुक्मी चाह मदोद्धत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! इस पर मूर्ख कलिंगराज दाँत दिखाकर जोर-जोर से हँसने लगा और मदमस्त रुक्मी बोला -॥15॥
 
O Brahmin! At this the foolish Kalingaraj started laughing loudly, showing his teeth and the intoxicated Rukmi said -॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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